बलिदानों की परम्परा विस्मृत जो तुमने कर डाली है।
येन केन प्रकरेण जीवन जीने की शैली तुमने अपना ली है।।
शोषित पीड़ित और अपमानित होकर अवसादों
में हो जीते जाते।
प्रितिपल प्रतिक्षण जीते मर मर और उस मरने से हो तुम घबराते।।
वर्षों जीते तिल तिल मर मर कुछ क्षण जीवन जीलो जी भर।
जीवन इस जग में है उसने जाना जिसने जाना जीना मरकर ।।
वो पाश लिए पीछा करती तुम प्राण लिये भागा करते।
वो मोहिनी बन छेड़े जो अलाप तुम सुध बुध खो सब सो जाते।।
है अटल सत्य यदि मृत्यु तुम्हारी उस प्राण प्रिय से क्यों घबराना।
इक श्वाश का है खेल सभी जग अपना है न बेगाना।।
जीवन का जो तुम मर्म यह जानो मृत्यु को यदि तुम अंत न मानो।
ये दृश्य जो है सब मिट जाएगा जो अमिट रहे उसको पहचानो।।
फिर आँखों में तुम आँख डालकर हाथ मृत्यु का हाथ में ले लो।
वो संग तुम्हारे चले निरंतर बन संगी साथी संग हो डोलो ।।
भय मुक्त हो बिना त्रास के हर क्षण जीवन जी जाओगे।
अदम्य साहस पुरुषार्थ प्रखर हो कुछ ऐसा तुम कर जाओगे।।
जगती का कल्याण करोगे माँ भारती का सम्बल बन जाओगे।
तन मन धन का कर समर्पण मातृ ऋण से उऋण हो जाओगे।।
जीवन के रहे उस पार भी जीवन हर मन आँगन तुम बस जाओगे।
जीवन अर्पण कर प्रस्थान करो जब तुम देव स्वरुप हो जाओगे।।
यह देश धन्य और धरा धन्य जग गीत तुम्हारे गायेगा।
मृत्यु रहेगी चिर ऋणी तुम्हारी जीवन कृतार्थ हो जाएगा।।। विजयन
Sunday, 29 October 2017
Wednesday, 14 September 2011
संसार मे भागे फिरते हो, संसार से तुम क्या पाओगे।
जब खुद के ही तुम हो न सके, संसार को क्या अपनाओगे।।1।।
तुम बाहर भागे फिरते हो, हम भीतर बड़ते जाते हैं।
तुम खुद को ढूडं न पाते हो, हम खुद मे खोते जाते हैं 2।।
जो बाहर है खो जाएगा, जो भीतर है, रह पाएगा।
तुम भीड़ बड़ाते जाते हो, उस भीड़ मे तुम खो जाओगे3।।
जब भीड़ भी ये खो जाएगी, मन आंगन सूना हो जाएगा।
जो दूर रहे खुद खुद से तुम, संसार भी न तुम पाओगे4।।
अपना कर तुम खुद को देखो, संसार तेरा हो जाएगा।
खुद को खोकर खुद को पाना, यहां जीवन अमर निरन्तर है।।5।।
इस बात को गर तुम समझ सको, तुम भीतर अपने आ जाना।
बस भीतर अपने आ जाना, तुम भीतर अपने आ जाना।।6।।
जब खुद के ही तुम हो न सके, संसार को क्या अपनाओगे।।1।।
तुम बाहर भागे फिरते हो, हम भीतर बड़ते जाते हैं।
तुम खुद को ढूडं न पाते हो, हम खुद मे खोते जाते हैं 2।।
जो बाहर है खो जाएगा, जो भीतर है, रह पाएगा।
तुम भीड़ बड़ाते जाते हो, उस भीड़ मे तुम खो जाओगे3।।
जब भीड़ भी ये खो जाएगी, मन आंगन सूना हो जाएगा।
जो दूर रहे खुद खुद से तुम, संसार भी न तुम पाओगे4।।
अपना कर तुम खुद को देखो, संसार तेरा हो जाएगा।
खुद को खोकर खुद को पाना, यहां जीवन अमर निरन्तर है।।5।।
इस बात को गर तुम समझ सको, तुम भीतर अपने आ जाना।
बस भीतर अपने आ जाना, तुम भीतर अपने आ जाना।।6।।
हमसफर
हमसफर
वक्त ने दिया उछाल, फिर इक सवाल, मासूम सा, जानिब मेरी।
के इल्म है, उसे आरजू का मेरी, चले वो दम ब दम हर कदम साथ मेरे।
पर गुजर गया इक बार जो वो राह गुजर से मेरी।
देख लूं कितना ही मुड़ के, न लोट आएगा फिर कभी वो राह मेरी।
गैर मुमकिन है जो, वो क्यों कर मुमकिन हो सके, सिर्फ मेरे लिए।
कहा मैने ए वक्त, गुजर तो मैं भी जाउगां,
लम्हा लम्हा कदम ब कदम चलते साथ तेरे
मगर लिख जाउगां इबारत कुछ ऐसी, अपने आमाल की,
हौसलों की कलम से, कोरे पन्नो पे तेरे।
के आईन्दा की तारीख के, हर दौर मे जब भी कभी कहीं जिक्र हो,
तेरे इस दौरे जमां का, तो चर्चा अपना भी शुमार संगे यार हो।।
वक्त ने दिया उछाल, फिर इक सवाल, मासूम सा, जानिब मेरी।
के इल्म है, उसे आरजू का मेरी, चले वो दम ब दम हर कदम साथ मेरे।
पर गुजर गया इक बार जो वो राह गुजर से मेरी।
देख लूं कितना ही मुड़ के, न लोट आएगा फिर कभी वो राह मेरी।
गैर मुमकिन है जो, वो क्यों कर मुमकिन हो सके, सिर्फ मेरे लिए।
कहा मैने ए वक्त, गुजर तो मैं भी जाउगां,
लम्हा लम्हा कदम ब कदम चलते साथ तेरे
मगर लिख जाउगां इबारत कुछ ऐसी, अपने आमाल की,
हौसलों की कलम से, कोरे पन्नो पे तेरे।
के आईन्दा की तारीख के, हर दौर मे जब भी कभी कहीं जिक्र हो,
तेरे इस दौरे जमां का, तो चर्चा अपना भी शुमार संगे यार हो।।
Saturday, 3 September 2011
JAGADGURU: Eid Mubaraq
JAGADGURU: Eid Mubaraq: Dear Friends ,B.J.P in its history ,1st time celebrating Eid on 5th September, Monday at Siri Fort Auditorium -1 ,August Kranti Marg, .A w...
Friday, 2 September 2011
Eid Mubaraq
The Function will be Graced by the August presence of B.J.P President Shree Nitin Gadkari Ji , Senior Leader B.J.P Shri Adwani Ji, Dr J.K Jain Ji, In charge of B.J.P Minority Cell, Shree Tanveer Ahmad ,President Of Minority Cell B.J.P,,Vice Chancellor Of Jamia Milia University ,Ambassador of Pakistan and many Distinguished Personalities Of Muslim World , You are cordially invited to please grace the occasion with your presence
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